८४ कोस यात्रा जहाँ यात्रा करने वाला चाहता था की यात्रा रोकी जाये और रोकने वाला की यात्रा की जाये

इलाहाबाद का माहोल उत्तर प्रदेश की जादा तर शहरों की तरह पिछले एक हफ्ते से तनाव ग्रस्त था। जिस शहर में पिछले कई महीनों से आरक्षण की आग थी वहां अब धरम के नाम पे तनाव था। जादा तर लोगों को इस मुद्दे से कुछ लेना देना नहीं था। लोगों को उत्सुकता थी की आखिर यह है क्या। प्रदेश के जादातर जिले इस समय बाड़ से ग्रस्त हैं ,हाहाकार मची है ,जहाँ पिछले २ दशक से बाड़ नहीं आयी थी इस साल वहां भी बाड़ है। लोगों का सबकुछ खतम हो गया है ,पर एक फिक्स्ड मैच के तेहत सपा और भाजपा  यात्रा -यात्रा खेल रहे है। अब अगर संप्रादियक दंगे होंगे तभी तो वोट बटेंगे। इलाहाबाद शहर में कुंभ मेले के नाम पे ना जाने कितन पैसा खर्च किया गया निकास के नाम पे ,पर सारा पानी शहर के अन्दर घुस गया। पता नहीं किस चीज़ का निकास हुआ। 
बहरहाल एक चीज़ जान के तस्सली हुई की आज लोगों को धरम और जाती के नाम पे बाटना उतना आसान नहीं रह गया। येही शहर है जहाँ पहले सम्पर्दियिक दंगे आम थे। लेकिन आज के युवक जागरूक है ,उसे सही गलत का पता है। उसे अपने हित के लिए इस्तमाल करना अब इन नेताओं के लिए इतना आसान नहीं है। आज का यूवा अपना हक जनता है और उस हक की लड़ाई भी लड़ना जनता 

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